प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘सुभाषितम’ सीरीज के तहत एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया। इसमें उन्होंने योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने की अपील की है।

पीएम मोदी ने लिखा, “योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है।”

इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि पतंजलि को समर्पित एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक भी साझा किया:

“योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।
योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥”

अर्थ: मन की चंचल वृत्तियों को योग से, वाणी की अशुद्धियों को व्याकरण से और शरीर की मलिनताओं को आयुर्वेद से दूर करने वाले मुनियों में श्रेष्ठ महर्षि पतंजलि को मैं प्रणाम करता हूं।

एक दिन पहले एकजुटता पर दिया था संदेश

ज्ञात हो, इससे एक दिन पहले बुधवार को पीएम मोदी ने ‘सुभाषितम’ के जरिए एकजुटता पर जोर देते हुए कहा था कि जब नागरिक एक सूत्र में बंध जाते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने इस संदेश के साथ एक और संस्कृत श्लोक साझा किया था, जिसमें लकड़ियों की उदाहरण के माध्यम से सामूहिक शक्ति की बात की गई थी।

प्रधानमंत्री मोदी की यह ‘सुभाषितम’ श्रृंखला प्रेरणादायक श्लोकों और संदेशों के माध्यम से लोगों को सकारात्मक सोच, स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करती है। योग दिवस के निकट आने के साथ उनका यह संदेश विशेष रूप से प्रासंगिक माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

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